खाकी: द बिहार चैप्टर के रियल हीरो अमित लोढ़ा अब निलंबित, दोषी निकले तो 10 साल तक सजा

खाकी: द बिहार चैप्टर के रियल हीरो अमित लोढ़ा अब निलंबित, दोषी निकले तो 10 साल तक सजा

खाकी: द बिहार चैप्टर के लीड एक्टर के साथ अमित लोढ़ा (दाएं)
– फोटो : अमर उजाला

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विशेष निगरानी इकाई की ओर से भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान के तहत प्राथमिकी की धाराएं सीनियर आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा को 4 से 10 साल तक की सजा दिला सकती है। 09 फरवरी 2023 तक अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इसपर फैसला होगा। फिलहाल, एएनआई के अनुसार अमित लोढ़ा को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने अभी निलंबन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन आईपीएस अधिकारियों के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान की इन धाराओं में निलंबन तय है।

लोक सेवक की कर्तव्यनिष्ठा से जुड़ी धाराएं हैं सभी

पुलिस मुख्यालय के अनुसार निलंबन किसी भी समय हो, लेकिन होना ही है। अमित लोढ़ा पर लगे आरोपों की प्राथमिक जांच के आधार पर भ्रष्टाचार की पुष्टि करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।प्राथमिकी के अनुसार, 2 नवंबर 2018 को अमित लोढ़ा और फ्राइडे स्टोरीटेलर्स के बीच एक रुपए में करार तो हुआ, लेकिन उनके खाते में 12,372 रुपए आए। यह रकम छोटी है, लेकिन लोकसेवक के लिए इस तरह की राशि लेना अपराध है। इसके अलावा, आरोप है कि लोढ़ा ने स्थापित कहानीकार नहीं होते हुए भी बगैर अनुमति के न केवल किताब लिखी, बल्कि प्रोडक्शन हाउस से इस किताब पर ‘खाकी: द बिहार चैप्टर’ बनाने के लिए पत्नी कौमुदी लोढ़ा के जरिए 49,62,372 रुपए अर्जित किए। लोढ़ा पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं और भारतीय दंड विधान 120 (B) और 168 के तहत यह केस दर्ज किया गया है। वरीय अधिवक्ता पंकज मैजरवार के अनुसार, दोनों भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान की जो भी धाराएं हैं, वह लोक सेवक की कर्तव्यनिष्ठा को धूमिल करने वाली हैं। इन धाराओं में एक से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान दर्ज है, हालांकि यह कोर्ट का विशेषाधिकार है कि वह तथ्यों को लेकर पेश सबूतों को कितना विश्वसनीय मानता है।

विस्तार

विशेष निगरानी इकाई की ओर से भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान के तहत प्राथमिकी की धाराएं सीनियर आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा को 4 से 10 साल तक की सजा दिला सकती है। 09 फरवरी 2023 तक अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इसपर फैसला होगा। फिलहाल, एएनआई के अनुसार अमित लोढ़ा को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने अभी निलंबन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन आईपीएस अधिकारियों के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान की इन धाराओं में निलंबन तय है।

लोक सेवक की कर्तव्यनिष्ठा से जुड़ी धाराएं हैं सभी

पुलिस मुख्यालय के अनुसार निलंबन किसी भी समय हो, लेकिन होना ही है। अमित लोढ़ा पर लगे आरोपों की प्राथमिक जांच के आधार पर भ्रष्टाचार की पुष्टि करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।प्राथमिकी के अनुसार, 2 नवंबर 2018 को अमित लोढ़ा और फ्राइडे स्टोरीटेलर्स के बीच एक रुपए में करार तो हुआ, लेकिन उनके खाते में 12,372 रुपए आए। यह रकम छोटी है, लेकिन लोकसेवक के लिए इस तरह की राशि लेना अपराध है। इसके अलावा, आरोप है कि लोढ़ा ने स्थापित कहानीकार नहीं होते हुए भी बगैर अनुमति के न केवल किताब लिखी, बल्कि प्रोडक्शन हाउस से इस किताब पर ‘खाकी: द बिहार चैप्टर’ बनाने के लिए पत्नी कौमुदी लोढ़ा के जरिए 49,62,372 रुपए अर्जित किए। लोढ़ा पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं और भारतीय दंड विधान 120 (B) और 168 के तहत यह केस दर्ज किया गया है। वरीय अधिवक्ता पंकज मैजरवार के अनुसार, दोनों भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान की जो भी धाराएं हैं, वह लोक सेवक की कर्तव्यनिष्ठा को धूमिल करने वाली हैं। इन धाराओं में एक से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान दर्ज है, हालांकि यह कोर्ट का विशेषाधिकार है कि वह तथ्यों को लेकर पेश सबूतों को कितना विश्वसनीय मानता है।



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